Tuesday, April 28, 2015
Tuesday, March 3, 2015
Friday, December 6, 2013
औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।
औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।
हम हर रोज़ अखबारों में पड़ते हैं कि किसी महिला के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ, और इत्यादि। ये सोचने कि बात है कि ऐसा महिलाओं के साथ क्यूँ होता है ? क्या पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता है ? क्या कभी किसी मीडिया ने इस बात का उजागर किया कि किसी लड़के के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ , नाज़ायज फायेदा उठाया गया ? क्या सिर्फ और सिर्फ लड़कियों के साथ होते हैं ? अभी परिस्थिति ऐसी हो गयी कि आप यदि किसी लड़की के कंधे पर हाथ डालके बात करो या उनसे दोस्ताना के रूप में मज़ाक करो तो कुछ देर बाद वही लड़की रिपोर्ट लिखाये कि उसका दोस्त / लड़के ने उसे छुआ और केस दर्ज हो जाता है। कानून ही हमारे देश में ऐसा बना हुआ है कि सब लड़कियों के फेवर में है। अभी कि स्तिथि में समाज पुरुष प्रधान नहीं है। ५०-५० हो गया है , पर हाँ scientifically लड़के थोड़े मजबूत होते हैं महिलाओं से।
IPC कि धारा 498 / 498 a का कुछ महिलाएं गलत फायेदा उठाकर लड़केवालों को सलाखों के पीछे डाल देते है , क्या ऐसा करना सही है ? लड़के पक्ष वालों कि बात क्यूँ नहीं सुनी जाती है ? भारत में इस प्रकार के कानूनों का संगसाधन होना ज़रूरी है तथा साथ में यह भी परिभाषित हो कि किस प्रकार का छूना , बोलना , हाथ रखना आदि क़ानूनी दायरे में आते हैं।
मानलीजिए कोई लड़की इंटरव्यू देने जाती है और उनका इंटरव्यू कंपनी के HR मेनेजर ले रहे हैं और किसी कारन वश उनका चयन नहीं होता है और लड़की बाद मे पुलिस स्टेशन पहुंचकर बयान दे कि फलाने ने मुझसे यह डिमांड किया, तो इस बाबत मेरा चयन नहीं हुआ। तो इस प्रकार के केसों का फिर क्या होगा ? क्या इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति सलाखों के पीछे होगा? बहुत ही अहम् प्रश्न है। आजकल अधिकतर केस झूटे होते हैं , बदला लेने के लिए भी हो सकता है। प्यार किया पर शादी नहीं हुई, दोस्त हैं, फिर जो भी दोनों के बीच आपसी सहमति से होता है और बादमे लड़की पुलिस में कम्प्लेन कर देती है। इस प्रकार के केसों का कैसे हल निकालेंगे।? इस अहम् विषय पर बहस होनी चाहिए और साथ ही कमेटी बनाकर सभी एंगल को ध्यान में रखकर कानून में संगसाधन होना चाहिए।
Monday, September 16, 2013
"बहाव " का गरिमामयी उपस्थिति में लोकार्पण।
"बहाव " का गरिमामयी उपस्थिति में लोकार्पण।
आज दिनांक 16 -9 -2013 को डॉ हिमांशु दिवेदी जी द्वारा लिखी गयी किताब "बहाव " का विधिवत गरिमामयी उपस्थिति में होटल बेबीलोन इन् , रायपुर में लोकार्पित हुआ। यह मेरे सौभाग्य की बात है की डॉ हिमांशु द्विवेदी जी ने मुझे इस अवसर पर उपस्थित होने के लिए निमंत्रण दिया। आज के इस लोकार्पण समारोह में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे साथ ही अध्यक्षता के रूप में दैनिक भास्कर समूह के प्रधान संचालक श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल जी भी उपस्थित थे।
इस गरिमामयी समारोह में प्रख्यात कवी श्री हरी ओम पवार , हरिभूमि समाचारपत्र समूह के चेयरमैन कैप्टेन रुद्रसेन सिन्धु , समाजसेवी तथा अंतर्राष्ट्रीय वक्ता श्री राजेश अग्रवाल, कोटा विधायक श्रीमती रेणु जोगी , रमन मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण , विपक्ष के नेतागण , तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
सभी मंचासीन सज्जनों ने डॉ हिमांशु जी द्वारा लिखी गयी किताब के बारे में कहा और सभी वक्ताओं का कहना था की बहाव होते रहना चाहिए केवल अच्छे कार्यों के लिए , प्रगति के लिए , समाज के उत्थान के लिए। जहाँ ठहराव आ जायेगा वहां शिथिलता आ जायेगा। जिस तरह पानी के बहते रहने के कारण पानी स्वच्छ रहता है और उसमे कीटाणु नहीं लगते ठीक उसी तरह मनुष्य को जीवन में हमेशा बहते रहना चाहिए न की ठहर जाना। जहाँ व्यक्ति ठहर जाता है उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है। इस किताब में विभिन्न देशों के यात्राओं के बारे में वर्णन किया गया है जिसमे शब्दों का चयन बहुत ही उच्च स्तरीय है और पढने से ऐसा प्रतीत होगा की आप खुद उस देश में भ्रमण कर रहे हो या अपने यात्रा का वर्णन किया हो। बहुत ही सहज तरीके से पाठकों के लिए शब्दों का चयन कर सहज माध्यम से पढने के लिए पाठकों तक लाया गया है।
पद्मश्री कवि डॉ सुरेन्द्र दुबे द्वारा मंच का संचालन बेहतरीन ढंग से या यूँ कहें अपने तरीके से कविता के माध्यम से संचालन किया गया तथा अंत में सभी को धन्यवाद देते हुए रात्रि भोज के लिए निमंत्रित किया गया ।
आज दिनांक 16 -9 -2013 को डॉ हिमांशु दिवेदी जी द्वारा लिखी गयी किताब "बहाव " का विधिवत गरिमामयी उपस्थिति में होटल बेबीलोन इन् , रायपुर में लोकार्पित हुआ। यह मेरे सौभाग्य की बात है की डॉ हिमांशु द्विवेदी जी ने मुझे इस अवसर पर उपस्थित होने के लिए निमंत्रण दिया। आज के इस लोकार्पण समारोह में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे साथ ही अध्यक्षता के रूप में दैनिक भास्कर समूह के प्रधान संचालक श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल जी भी उपस्थित थे।
इस गरिमामयी समारोह में प्रख्यात कवी श्री हरी ओम पवार , हरिभूमि समाचारपत्र समूह के चेयरमैन कैप्टेन रुद्रसेन सिन्धु , समाजसेवी तथा अंतर्राष्ट्रीय वक्ता श्री राजेश अग्रवाल, कोटा विधायक श्रीमती रेणु जोगी , रमन मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण , विपक्ष के नेतागण , तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
सभी मंचासीन सज्जनों ने डॉ हिमांशु जी द्वारा लिखी गयी किताब के बारे में कहा और सभी वक्ताओं का कहना था की बहाव होते रहना चाहिए केवल अच्छे कार्यों के लिए , प्रगति के लिए , समाज के उत्थान के लिए। जहाँ ठहराव आ जायेगा वहां शिथिलता आ जायेगा। जिस तरह पानी के बहते रहने के कारण पानी स्वच्छ रहता है और उसमे कीटाणु नहीं लगते ठीक उसी तरह मनुष्य को जीवन में हमेशा बहते रहना चाहिए न की ठहर जाना। जहाँ व्यक्ति ठहर जाता है उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है। इस किताब में विभिन्न देशों के यात्राओं के बारे में वर्णन किया गया है जिसमे शब्दों का चयन बहुत ही उच्च स्तरीय है और पढने से ऐसा प्रतीत होगा की आप खुद उस देश में भ्रमण कर रहे हो या अपने यात्रा का वर्णन किया हो। बहुत ही सहज तरीके से पाठकों के लिए शब्दों का चयन कर सहज माध्यम से पढने के लिए पाठकों तक लाया गया है।
पद्मश्री कवि डॉ सुरेन्द्र दुबे द्वारा मंच का संचालन बेहतरीन ढंग से या यूँ कहें अपने तरीके से कविता के माध्यम से संचालन किया गया तथा अंत में सभी को धन्यवाद देते हुए रात्रि भोज के लिए निमंत्रित किया गया ।
Thursday, September 12, 2013
हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा नहीं !
हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा नहीं !
आज समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ की "हिन्दी " भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। लखनऊ के सुचना अधिकार कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा को सुचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा मिली सुचना के अनुसार भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत "हिन्दी " भारत की "राजभाषा " है। भारत के संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है।
अब इस पर बहस होगा, और बहस जरी रहती है की संविधान में परिवर्तन होगा यह तो समय ही बताएगा।
आज समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ की "हिन्दी " भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। लखनऊ के सुचना अधिकार कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा को सुचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा मिली सुचना के अनुसार भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत "हिन्दी " भारत की "राजभाषा " है। भारत के संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है।
फिर भारत की राष्ट्रभाषा क्या है ???
अब इस पर बहस होगा, और बहस जरी रहती है की संविधान में परिवर्तन होगा यह तो समय ही बताएगा।
Wednesday, September 11, 2013
चुनाव के मद्देनज़र अपना कीमती वोट सोच - समझकर दीजियेगा।
चुनाव के मद्देनज़र अपना कीमती वोट सोच - समझकर दीजियेगा।
आपका एक वोट भारत की तस्वीर बदल सकता है।
किसी के बहकावे में आकर अपना मत न बदलिए।
डरने की भी ज़रूरत नहीं।
आप खुद एक स्वच्छ सरकार बना सकते हैं।
आप खुद एक स्वच्छ सरकार बना सकते हैं।
2 महीने के अन्दर 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को है ,
फिर उसके बाद लोकसभा चुनाव। सरकार आपको बनानी है न की
सरकार अपने आप को खुद चुनेगी।
चरों तरफ कीमतें बढ़ी हुई है ,और मध्यमवर्गीय और गरीब तबके के लोग रो रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता जा रहा है। जघन्य अपराध घटित हो रहे हैं। कुछ साधू / संत तबके के लोग बेनकाब हो रहें है जिन पर आम लोग आस्था रखे हुए थे।
ये साधू जो पकड़ में आये हैं इनके पास अकूत संपत्ति है तथा ये साधू / संत, संस्कार सिखा रहे थे, मधुर वाणी से प्रवचन दे रहे थे , लोगों की ज़मीन तक इन लोगों ने हड़प ली। अब आप ही देखो इनका हश्र क्या होता है ?
हिंसक घटनाये बढ़ गयी है। बेरोजगारी हद से अधिक बढ़ गयी है। उद्योग नुकसान न झेलने के कारण छटाई कर रही है जिससे बेरोजगारी बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है।छत्तीसगढ़ में कई उद्योग तो नुकसान न झेलने के कारण बंद हो गए हैं और कई उद्योग\बंद के कगार पढ़ खढ़े है।
क्या होगा ये भगवान ही जनता है।
क्या होगा ये भगवान ही जनता है।
Tuesday, September 10, 2013
अब शुरू होगी पदयात्रा।
अब शुरू होगी पदयात्रा।
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा और भाजपा की विकास यात्रा के बाद अब पदयात्रा की बारी है। कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा शुरू किया और भाजपा द्वारा किये गए भ्रष्टाचारों को लोगो तक पहुँचा ही रहे थे की जीरम घाटी में हुए वृहद् नक्सली हमलों ने यात्रा को रोक दिया। इस नक्सली हमले में कांग्रेस के कद्दावार नेताओं की मौत हो गयी और बहुत से कार्यकर्ता मारे गए और कुछ कार्यकर्ता एवं नेता हमले में घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना को देखते हुए भाजपा ने अपनी विकास यात्रा बीच में ही बंध कर दिया। जब सब शांत हुआ तब फिर प्रदेश की राजनीती धीरे-धीरे गर्माने लगी। एक तरफ जहाँ कांग्रेस ने कलश यात्रा शुरू किया तो दूसरी तरफ भाजपा ने फिर से विकास यात्रा शुरू किया। इससे लाभ किसी को हो न हो परन्तु मीडिया को लाभ अवश्य हुआ है विज्ञापन के रूप में।
अब आते हैं राजनीती के अखाड़े में। विकास की नदियाँ बहाने के बाद अब भाजपा जुटी हुई है नाराज नेतायों को मानाने तथा समूचे 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी चयन के लिए। सीधी सी बात है दमखम रखनेवाले नेता सभी सक्रिय हो गए हैं अपने अपने शेत्रों में और अपना दावेदारी दिखने में। तय तो वही होगा जो हाई कमान करेगा। इधर कांग्रेस ने सभी विधानसभावार सूचि बना ली है और बड़े नेता दिल्ली में डेट हुए हैं अपने पसंद के उम्मीदवार को टिकेट दिलाने में। कोई राहुल गाँधी से मिल रहा है, तो कोई महंत जी से, कोई हरिप्रसाद जी से तो कोई दिग्विजय सिंह जी से। कुलमिलाकर मेलजोल चल रहा है। तय तो वाही होगा जो स्क्रीनिंग कमिटी करेगी और जिनके ऊपर हाई कमान का आशीर्वाद होगा। लेकिन यहाँ हाई कमान हम किसे बोले ? केंद्रीय नेत्रित्व को या प्रदेश के नेतृत्त्व को ? छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में भी धड़ा बना हुआ है। एक तरफ संगठन खेमा जिसमे महंत, रविन्द्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा हैं , दूसरी तरफ शक्तिशाली जोगी खेमा और तीसरी तरफ भूपेश खेमा। जोगी खेमा को ज्यादा तवज्जो न मिलने के कारण वे नाराज चल रहे हैं और अकेले ही संगठन खेमा के विपरीत सभाएं ले रहें हैं। अब मतदाता किसकी सुने ? कांग्रेस के संगठन खेमे की या जोगी खेमे की या भाजपा की ? मतदाता बहुत ही कन्फ्यूज्ड हैं।
भाई कुछ भी हो इस बार चुनाव दिलचस्प होने वाला है। यह पहला चुनाव होगा जिसमे विद्या भैया नहीं होंगे साथ ही श्यामा भैया , नन्द कुमार पटेल जी , महेंद्र कर्मा जी, उदय मुदालियर जी भी नहीं होंगे। ठीक इसी तरह भाजपा में दिलीप सिंह जूदेव जी, बलिराम कश्यप जी भी नहीं होंगे। साथ ही यहाँ देखने मिलेगा की अन्य पार्टियाँ जैसे स्वाभिमान मंच , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, संगमा जी की पार्टी, कमुनिस्ट पार्टी इत्यादि किसे लाभ पहुंचती है ? भाजपा में भले अंदरूनी मतभेद हों लेकिन वो सामने नहीं दिख रहा है , परन्तु कांग्रेस का मतभेद जग जाहिर हो जा रहा है। ऐसी स्तिथि में कौन सी पार्टी बहुमत लाएगी और कौन सी पार्टी किंग मेकर साबित होगी यह समय के गर्भ में है।
भगवन गणेश जी विराज गए हैं , अब त्येहारों का सिलसिला शुरू हो जायेगा और इसी के साथ सभी पार्टियों के नेताओं का पैदल यात्रा भी। अब नेतागण पूजा मंडपों में, कीर्तनों में , रावण जलाने के मौके पे , जगराता में इत्यादि स्थानों पे पाए जायेंगे जनसंपर्क करते हुए। जनसंपर्क तो गाड़ियों से नहीं होगी ना , पैदल यात्रा करना होगा। ये राजनीती भी बड़ी अजीब है साड़े चार साल गाड़ियों में घुमाती है और बाकि पांच महीने पैदल यात्रा करवाती है। भैया यह पैदल यात्रा या जनसंपर्क कोई खेल नहीं है, यह बारहवीं के परीक्षा जैसा है , इसमें कैसा उत्तर मतदाता देते हैं उस पर मार्क्स मिलेंगे नेतायों को। जिस पार्टी के जितने नेता ज्यादा पास होंगे वही पार्टी शाशन करेगी या यूँ बोले "राज " करेगी। तो भैया तैयार हो जाओ परीक्षा देने और पास होने के लिए।
Monday, September 9, 2013
Sunday, September 8, 2013
कुकृत्य के समाचार सम्मानीय दैनिक में प्रकाशित होना बंद होना चाहिए।
कुकृत्य के समाचार सम्मानीय दैनिक
में प्रकाशित होना बंद होना चाहिए।
में प्रकाशित होना बंद होना चाहिए।
विगत साल भर के करीब हम रोजाना समाचार पत्रों में रेप का 2 -3 समाचार रोजाना पड़ते आ रहे हैं। कभी इस प्रकार के कुकृत्य का समाचार फ्रंट पेज का न्यूज़ बनती है या इनर पेज में प्रकाशित होती है। सुबह उठकर प्रत्येक व्यक्ति कुछ अच्छे समाचारों से रूबरू होना चाहता है जिससे की सुबह - सुबह मन फ्रेश लगे और दिन अच्छा हो । लेकिन यदि इस प्रकार का समाचार फ्रंट पेज में प्रकाशित हो तो समाचार पत्र पड़ने वाले व्यक्ति का मुड का सत्यानाश हो जाता है तथा इस प्रकार के समाचार मन-मस्तिष्क में विपरीत असर भी डालता है। समाचार पत्र केवल वयस्क ही तो नहीं पड़ते है न, घर के दुसरे सदस्य भी पड़ते है, तो सोचिये किस प्रकार का प्रभाव पड़ेगा ? समाचार पत्र से इस कुकृत्य का समाचार पड़ने पर मालूम होता है की आज कल बच्चे भी इससे अछूते नहीं रह गए हैं। क्या हम इसे मस्तिष्क विकृति की संज्ञा दे सकते हैं ?
प्रत्येक दिन ऐसी घटना दुनिया भर में घाट रही है, और हम यदि सभी को प्रकाशित करने लगे तो पूरा का पूरा अख़बार इस प्रकार के समाचार से भर जायेगा। आज मनुष्य के मन मंदिर में एक अंजना सा डर बैठ गया है। आज हम भी, जब सुबह अख़बार पड़ने के लिए बैठते हैं तो भगवन से प्रार्थना करके बैठते हैं की आज कोई कुकृत्य का समाचार हमे पड़ने को न मिले। 3 साल , 6 -साल , 10 साल के बच्चियों से कुकृत्य ? ये क्या है ? बाप द्वारा बेटी से कुकृत्य , मामा , मौसा, इत्यादि, इन समाचारों को पढने के बाद तो रिश्तों से मन डरने पर मजबूर हो जाता है। किस पर भरोसा करे और किस पर नहीं ? यह बहुत ही बड़ी विडम्बना है। और दिनों दिन इस प्रकार की घटना बढती जा रही है ? अब पानी सर के ऊपर जा चूका है। शासन को इस पर बहुत ही गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। वैज्ञानिकों को कैंसर से पहले कुकृत्य न करने का वैक्सीन बनाना चाहिए और सभी को vaccinated करना चाहिए, तभी जाकर हमे इस प्रकार की मस्तिष्क की बिमारियों से मुक्ति मिलेगी और स्वस्थ समाज बनेगा, रिश्तेदारी कायम रहेगी।
Wednesday, September 4, 2013
Tuesday, September 3, 2013
Thursday, August 29, 2013
बेरोजगारी दस्तक दे रही है।
बेरोजगारी दस्तक दे रही है।
विगत 25 दिनों से सभी सम्मानीय समाचार पत्रों से जानकारी मिल रही है की छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट अत्याधिक घाटे के कारण अपने अपने इकाईयों को बंध कर दिए हैं। ये घाटे विध्युत मंडल के निति के कारण हो रहे हैं। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अशोक सुराना का कहना है की छत्तीसगढ़ राज्य विध्युत मंडल द्वारा स्थाई डिमांड चार्ज रु 360 /- प्रति केवीए वसूला जा रहा है , साथ ही विध्युत दर रु 4.97/- प्रति यूनिट नेट वसूला जा रहा है। इसके साथ 6% विध्युत शुल्क भी लिया जा रहा है। आगे उनका कहना है की रायगढ़ स्थित जिंदल पार्क के 30 मिनी स्टील प्लांटों को जिंदल द्वारा रु 3.18 प्रति यूनिट नेट में बिजली मुहैया कराई जा रही है और कुछ चुनिन्दे इंटीग्रेटेड स्टील प्लांटो को रु 3.00 /- से भी कम लागत आती है विध्युत उत्पादन करने में।
इससे यह प्रतीत होता है की फर्नेस उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश में 3 -प्रकार के विध्युत दर प्रचलित है।
ऐसा क्यूँ ? यह बहुत ही बड़ा प्रश्न है। सुराना जी का कहना है की हमने राज्य शाशन के समक्ष यह मांग राखी है की डिमांड चार्ज को रु 180 /- प्रति केवीए , विद्युत दर को रु 3.50 /- प्रति यूनिट नेट में , तथा 6% विध्युत शुल्क को हटा दिया जाये एवं रात्रि कालिन विद्युत दरों में 30 % की छुट दी जाये। अभी फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रदेश में विध्युत सरप्लस है, तो क्यूँ राज्य शाशन रात्रि कालीन विध्युत दरों में 30 % की छुट नहीं दे रही है। सरप्लस बिजली मंडल के पास होने के कारण CSPDCL ने जुलाई -2013 से किसी भी प्राइवेट बिजली उत्पादन कंपनी से एमओयू नहीं किया है।
मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने 10 अगस्त 2013 को छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी से मुलाकात कर मिनी स्टील प्लांटो के हालत के बारे में विस्तृत रूप में जानकारी दी तद्पश्च्यात माननीय मुख्यमंत्री जी ने उन्हें आश्वासन दिया और उनसे मिनी स्टील प्लांटों को पुनः चालू करने के लिए कहा और ये भी सुझाया की उर्जा सचिव और प्रबंध संचालक CSPDCL से मीटिंग कर निर्णय लेकर मुख्यमंत्री महोदय को अवगत कराएँ। जैसा की सुचना है की मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने प्रबंध संचालक CSPDCL से मुलाकात कर ली है और अभी अमन सिंह जी से समय न मिलने के कारन मामला अधर में लटका हुआ है।
अधर में मामला लटके होने के कारण , मिनी स्टील प्लांट में कार्यरत कर्मचारी और मजदूरों का भविष्य भी अधर में है। यदि मिनी स्टील प्लांट संपूर्ण रूप से बंध हो जाते हैं तो कर्मचारी और मजदूरों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो जाएगी। आने वाला\समय त्योहारों का है और अविलम्ब शाशन द्वारा यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया हो तो बेचारे इन कर्मचारियों एवं मजदूर भाइयों को फीकी त्योहार मनाना पड़ सकता है।
आज जब हम विकास की गाथा गा रहे हैं और आम जनता तक विकास की बातें रख रहें है और कई करोरो रुपया का सौगात दे रहें हैं तो शाशन क्यूँ नहीं इन मिनी स्टील प्लांटों की समस्या का समाधान कर रही है। मिनी स्टील प्लांट के कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग जुड़े हुए हैं, इनका भविष्य क्या होगा ? इस विषय पर छत्तीसगढ़ शाशन को गहरी चिंतन कर त्वरित निर्णय लेकर बंद के कगार पर खड़े उद्योगों को रहत पैकेज का सौगात देकर उन्हें जीवित रखने का प्रयास करना चाहिए। ये शाशन को आनेवाले 20 दिनों के अन्दर निर्णय लेना होगा नहीं तो यदि आदर्श अचारसंहिता लग गया तो फिर क्या होगा ये समय के गर्व में है।
विगत 25 दिनों से सभी सम्मानीय समाचार पत्रों से जानकारी मिल रही है की छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट अत्याधिक घाटे के कारण अपने अपने इकाईयों को बंध कर दिए हैं। ये घाटे विध्युत मंडल के निति के कारण हो रहे हैं। मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अशोक सुराना का कहना है की छत्तीसगढ़ राज्य विध्युत मंडल द्वारा स्थाई डिमांड चार्ज रु 360 /- प्रति केवीए वसूला जा रहा है , साथ ही विध्युत दर रु 4.97/- प्रति यूनिट नेट वसूला जा रहा है। इसके साथ 6% विध्युत शुल्क भी लिया जा रहा है। आगे उनका कहना है की रायगढ़ स्थित जिंदल पार्क के 30 मिनी स्टील प्लांटों को जिंदल द्वारा रु 3.18 प्रति यूनिट नेट में बिजली मुहैया कराई जा रही है और कुछ चुनिन्दे इंटीग्रेटेड स्टील प्लांटो को रु 3.00 /- से भी कम लागत आती है विध्युत उत्पादन करने में।
इससे यह प्रतीत होता है की फर्नेस उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश में 3 -प्रकार के विध्युत दर प्रचलित है।
ऐसा क्यूँ ? यह बहुत ही बड़ा प्रश्न है। सुराना जी का कहना है की हमने राज्य शाशन के समक्ष यह मांग राखी है की डिमांड चार्ज को रु 180 /- प्रति केवीए , विद्युत दर को रु 3.50 /- प्रति यूनिट नेट में , तथा 6% विध्युत शुल्क को हटा दिया जाये एवं रात्रि कालिन विद्युत दरों में 30 % की छुट दी जाये। अभी फिलहाल छत्तीसगढ़ प्रदेश में विध्युत सरप्लस है, तो क्यूँ राज्य शाशन रात्रि कालीन विध्युत दरों में 30 % की छुट नहीं दे रही है। सरप्लस बिजली मंडल के पास होने के कारण CSPDCL ने जुलाई -2013 से किसी भी प्राइवेट बिजली उत्पादन कंपनी से एमओयू नहीं किया है।
मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने 10 अगस्त 2013 को छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह जी से मुलाकात कर मिनी स्टील प्लांटो के हालत के बारे में विस्तृत रूप में जानकारी दी तद्पश्च्यात माननीय मुख्यमंत्री जी ने उन्हें आश्वासन दिया और उनसे मिनी स्टील प्लांटों को पुनः चालू करने के लिए कहा और ये भी सुझाया की उर्जा सचिव और प्रबंध संचालक CSPDCL से मीटिंग कर निर्णय लेकर मुख्यमंत्री महोदय को अवगत कराएँ। जैसा की सुचना है की मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने प्रबंध संचालक CSPDCL से मुलाकात कर ली है और अभी अमन सिंह जी से समय न मिलने के कारन मामला अधर में लटका हुआ है।
अधर में मामला लटके होने के कारण , मिनी स्टील प्लांट में कार्यरत कर्मचारी और मजदूरों का भविष्य भी अधर में है। यदि मिनी स्टील प्लांट संपूर्ण रूप से बंध हो जाते हैं तो कर्मचारी और मजदूरों के सामने रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो जाएगी। आने वाला\समय त्योहारों का है और अविलम्ब शाशन द्वारा यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया हो तो बेचारे इन कर्मचारियों एवं मजदूर भाइयों को फीकी त्योहार मनाना पड़ सकता है।
आज जब हम विकास की गाथा गा रहे हैं और आम जनता तक विकास की बातें रख रहें है और कई करोरो रुपया का सौगात दे रहें हैं तो शाशन क्यूँ नहीं इन मिनी स्टील प्लांटों की समस्या का समाधान कर रही है। मिनी स्टील प्लांट के कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग जुड़े हुए हैं, इनका भविष्य क्या होगा ? इस विषय पर छत्तीसगढ़ शाशन को गहरी चिंतन कर त्वरित निर्णय लेकर बंद के कगार पर खड़े उद्योगों को रहत पैकेज का सौगात देकर उन्हें जीवित रखने का प्रयास करना चाहिए। ये शाशन को आनेवाले 20 दिनों के अन्दर निर्णय लेना होगा नहीं तो यदि आदर्श अचारसंहिता लग गया तो फिर क्या होगा ये समय के गर्व में है।
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