Tuesday, April 28, 2015

Tuesday, March 3, 2015

Holi - 6-3-15




Friday, December 6, 2013

औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।

औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।


हम हर रोज़ अखबारों में पड़ते हैं कि किसी महिला के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ, और इत्यादि। ये सोचने कि बात है कि ऐसा महिलाओं के साथ क्यूँ होता है ? क्या पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता है ? क्या कभी किसी मीडिया ने इस बात का उजागर किया कि किसी लड़के के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ , नाज़ायज फायेदा उठाया गया ? क्या सिर्फ और सिर्फ लड़कियों के साथ होते हैं ? अभी परिस्थिति ऐसी हो गयी कि आप यदि किसी लड़की के कंधे पर हाथ डालके बात करो या उनसे दोस्ताना के रूप में मज़ाक करो तो कुछ देर बाद वही लड़की रिपोर्ट लिखाये कि उसका दोस्त / लड़के ने उसे छुआ और केस दर्ज हो जाता है। कानून ही हमारे देश में ऐसा बना हुआ है कि सब लड़कियों के फेवर में है। अभी कि स्तिथि में समाज पुरुष प्रधान नहीं है। ५०-५० हो गया है , पर हाँ scientifically लड़के थोड़े मजबूत होते हैं महिलाओं से।


IPC कि धारा 498 / 498 a का कुछ महिलाएं गलत फायेदा उठाकर लड़केवालों को सलाखों के पीछे डाल देते है , क्या ऐसा करना सही है ? लड़के पक्ष वालों कि बात क्यूँ नहीं सुनी जाती है ? भारत में इस प्रकार के कानूनों का संगसाधन होना ज़रूरी है तथा साथ में यह भी परिभाषित हो कि किस प्रकार का छूना , बोलना , हाथ रखना आदि क़ानूनी दायरे में आते हैं।

मानलीजिए कोई लड़की इंटरव्यू देने जाती है और उनका इंटरव्यू कंपनी के HR मेनेजर ले रहे हैं और किसी कारन वश उनका चयन नहीं होता है  और लड़की बाद मे पुलिस स्टेशन पहुंचकर बयान  दे कि फलाने  ने मुझसे यह डिमांड किया, तो इस बाबत मेरा चयन नहीं हुआ।  तो इस प्रकार के केसों का फिर क्या होगा ? क्या इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति सलाखों के पीछे होगा? बहुत ही अहम् प्रश्न  है।  आजकल अधिकतर केस झूटे होते हैं , बदला लेने के लिए भी हो सकता है।  प्यार किया पर शादी नहीं हुई, दोस्त हैं, फिर जो भी दोनों के बीच आपसी सहमति से होता है और बादमे लड़की पुलिस में कम्प्लेन कर देती है। इस प्रकार के केसों का कैसे हल निकालेंगे।? इस अहम् विषय पर बहस होनी चाहिए और साथ ही कमेटी बनाकर सभी एंगल को ध्यान में रखकर कानून में संगसाधन होना चाहिए।

Monday, September 16, 2013

"बहाव " का गरिमामयी उपस्थिति में लोकार्पण।

"बहाव " का गरिमामयी उपस्थिति में लोकार्पण। 

आज दिनांक 16 -9 -2013  को  डॉ हिमांशु दिवेदी जी द्वारा लिखी गयी  किताब "बहाव " का विधिवत गरिमामयी उपस्थिति में होटल बेबीलोन इन् , रायपुर में लोकार्पित हुआ। यह मेरे सौभाग्य की बात है की डॉ हिमांशु द्विवेदी जी ने मुझे इस अवसर पर उपस्थित होने के लिए निमंत्रण दिया। आज के इस लोकार्पण समारोह में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे साथ ही अध्यक्षता के रूप में दैनिक भास्कर समूह के प्रधान संचालक श्री रमेश चन्द्र अग्रवाल जी भी उपस्थित थे। 

इस गरिमामयी समारोह में प्रख्यात कवी श्री  हरी ओम पवार , हरिभूमि समाचारपत्र समूह के चेयरमैन कैप्टेन रुद्रसेन सिन्धु , समाजसेवी तथा अंतर्राष्ट्रीय वक्ता श्री राजेश अग्रवाल, कोटा विधायक श्रीमती रेणु जोगी , रमन मंत्रिमंडल के सभी मंत्रीगण , विपक्ष के नेतागण , तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे। 

सभी मंचासीन सज्जनों ने डॉ हिमांशु जी द्वारा लिखी गयी किताब के बारे में कहा और सभी वक्ताओं का कहना था की बहाव होते रहना चाहिए केवल अच्छे कार्यों के लिए , प्रगति के लिए , समाज के उत्थान के लिए।  जहाँ ठहराव आ जायेगा वहां  शिथिलता  आ जायेगा।  जिस तरह पानी के बहते रहने के कारण पानी स्वच्छ रहता है और उसमे कीटाणु नहीं लगते ठीक उसी तरह मनुष्य को जीवन में हमेशा बहते रहना चाहिए  न की ठहर जाना। जहाँ व्यक्ति ठहर जाता है उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है। इस किताब में विभिन्न देशों के यात्राओं के बारे में वर्णन किया गया है जिसमे शब्दों का चयन बहुत ही उच्च स्तरीय है और पढने से ऐसा प्रतीत होगा की आप खुद उस देश में भ्रमण कर रहे हो या अपने यात्रा का वर्णन किया हो। बहुत ही सहज तरीके से पाठकों के लिए शब्दों का चयन कर सहज माध्यम से पढने के लिए पाठकों तक लाया गया है। 

पद्मश्री कवि डॉ सुरेन्द्र दुबे द्वारा मंच का संचालन बेहतरीन ढंग से या यूँ कहें अपने तरीके से कविता के माध्यम से संचालन किया गया तथा अंत में सभी को धन्यवाद देते हुए रात्रि भोज के लिए निमंत्रित किया गया । 

























Thursday, September 12, 2013

हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा नहीं !

हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा नहीं !

आज समाचार पत्रों से ज्ञात हुआ की "हिन्दी " भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। लखनऊ के सुचना अधिकार कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा को सुचना के अधिकार के तहत भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा मिली सुचना के अनुसार भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत "हिन्दी " भारत की "राजभाषा " है। भारत के संविधान में राष्ट्रभाषा का कोई उल्लेख नहीं है। 



फिर भारत की राष्ट्रभाषा क्या है ???

अब इस पर बहस होगा, और बहस जरी रहती है की संविधान में परिवर्तन होगा यह तो समय ही बताएगा। 

Wednesday, September 11, 2013

चुनाव के मद्देनज़र अपना कीमती वोट सोच - समझकर दीजियेगा।

चुनाव के मद्देनज़र अपना कीमती वोट सोच - समझकर  दीजियेगा।
आपका एक वोट भारत की तस्वीर बदल सकता है। 

किसी के बहकावे में आकर अपना मत न बदलिए। 

डरने की भी ज़रूरत नहीं। 
आप खुद एक स्वच्छ सरकार बना सकते हैं। 



2 महीने के अन्दर 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को है ,
फिर उसके बाद लोकसभा चुनाव। सरकार आपको बनानी है न की 
सरकार अपने आप को खुद चुनेगी। 

चरों तरफ कीमतें बढ़ी हुई है ,और मध्यमवर्गीय और गरीब तबके के लोग रो रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता जा रहा है। जघन्य अपराध घटित हो रहे हैं। कुछ साधू / संत तबके के लोग बेनकाब हो रहें है जिन पर आम लोग आस्था रखे हुए थे।

ये साधू जो पकड़ में आये हैं इनके पास अकूत संपत्ति है  तथा  ये साधू / संत, संस्कार सिखा  रहे थे, मधुर वाणी से प्रवचन दे रहे थे , लोगों की ज़मीन तक इन लोगों ने हड़प ली। अब आप ही देखो इनका हश्र क्या होता है ? 

हिंसक घटनाये बढ़ गयी है। बेरोजगारी हद से अधिक बढ़ गयी है। उद्योग नुकसान न झेलने के कारण छटाई कर रही है जिससे बेरोजगारी बहुत ही ज्यादा बढ़ गयी है।छत्तीसगढ़  में कई उद्योग तो नुकसान न झेलने के कारण बंद हो गए हैं और कई उद्योग\बंद के कगार पढ़ खढ़े  है। 
क्या होगा ये भगवान ही जनता है। 



Tuesday, September 10, 2013

अब शुरू होगी पदयात्रा।

अब शुरू होगी पदयात्रा। 

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा और भाजपा की विकास यात्रा के बाद अब पदयात्रा की बारी है। कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा शुरू किया और भाजपा द्वारा किये गए भ्रष्टाचारों को लोगो तक पहुँचा ही रहे थे की जीरम घाटी में हुए वृहद् नक्सली हमलों ने यात्रा को रोक दिया। इस नक्सली हमले में कांग्रेस के कद्दावार नेताओं की मौत हो गयी और बहुत से कार्यकर्ता मारे गए और कुछ कार्यकर्ता एवं नेता हमले में घायल हो गए।  इस दर्दनाक घटना को देखते हुए भाजपा ने अपनी विकास यात्रा बीच में ही बंध कर दिया। जब सब शांत हुआ तब फिर प्रदेश की राजनीती धीरे-धीरे गर्माने लगी।  एक तरफ जहाँ कांग्रेस ने कलश यात्रा शुरू किया तो दूसरी तरफ भाजपा ने फिर से विकास यात्रा शुरू किया। इससे लाभ किसी को हो न हो परन्तु मीडिया को लाभ अवश्य हुआ है विज्ञापन के रूप में। 

अब आते हैं राजनीती के अखाड़े में।  विकास की नदियाँ बहाने के बाद अब भाजपा जुटी हुई है नाराज नेतायों को मानाने तथा समूचे 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी चयन के लिए। सीधी सी बात है दमखम रखनेवाले नेता सभी सक्रिय हो गए हैं अपने अपने शेत्रों में और अपना दावेदारी दिखने में।  तय तो वही होगा जो हाई कमान करेगा। इधर कांग्रेस ने सभी विधानसभावार सूचि बना ली है और बड़े नेता दिल्ली में डेट हुए हैं अपने पसंद के उम्मीदवार को टिकेट दिलाने में।  कोई राहुल गाँधी से मिल रहा है, तो कोई महंत जी से, कोई हरिप्रसाद जी से तो कोई दिग्विजय सिंह जी से। कुलमिलाकर मेलजोल चल रहा है। तय तो वाही होगा जो स्क्रीनिंग कमिटी करेगी और जिनके ऊपर हाई कमान का आशीर्वाद होगा।  लेकिन यहाँ हाई कमान हम किसे बोले ? केंद्रीय नेत्रित्व को या प्रदेश के नेतृत्त्व को ? छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में भी धड़ा बना हुआ है। एक तरफ संगठन खेमा जिसमे महंत, रविन्द्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा हैं , दूसरी तरफ शक्तिशाली जोगी खेमा और तीसरी तरफ भूपेश खेमा। जोगी खेमा को ज्यादा तवज्जो न मिलने के कारण वे नाराज चल रहे हैं और  अकेले ही संगठन खेमा के विपरीत सभाएं ले रहें हैं।  अब मतदाता किसकी सुने ? कांग्रेस के संगठन खेमे की या जोगी खेमे की या भाजपा की ? मतदाता बहुत ही कन्फ्यूज्ड हैं। 

भाई कुछ भी हो इस बार चुनाव दिलचस्प होने वाला है।  यह पहला चुनाव होगा जिसमे विद्या भैया नहीं होंगे  साथ ही श्यामा भैया , नन्द कुमार पटेल जी , महेंद्र कर्मा जी, उदय मुदालियर जी भी नहीं होंगे।  ठीक इसी तरह भाजपा में दिलीप सिंह जूदेव जी, बलिराम कश्यप जी भी नहीं होंगे। साथ ही यहाँ देखने मिलेगा की अन्य पार्टियाँ जैसे स्वाभिमान मंच , राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, संगमा जी की पार्टी, कमुनिस्ट पार्टी इत्यादि किसे लाभ पहुंचती है ? भाजपा में भले अंदरूनी मतभेद हों लेकिन वो सामने नहीं दिख रहा है , परन्तु कांग्रेस का मतभेद जग जाहिर हो जा रहा है। ऐसी स्तिथि में कौन सी पार्टी बहुमत लाएगी और कौन सी पार्टी किंग मेकर साबित होगी यह समय के गर्भ में है। 

भगवन गणेश जी विराज गए हैं , अब त्येहारों का सिलसिला शुरू हो जायेगा और इसी के साथ सभी पार्टियों के नेताओं का पैदल यात्रा भी। अब नेतागण पूजा मंडपों में, कीर्तनों में , रावण जलाने के मौके पे , जगराता में इत्यादि स्थानों पे पाए जायेंगे जनसंपर्क करते हुए। जनसंपर्क तो गाड़ियों से नहीं होगी ना , पैदल यात्रा करना होगा।  ये राजनीती भी बड़ी अजीब है साड़े चार साल गाड़ियों में घुमाती है और बाकि पांच महीने पैदल यात्रा करवाती है। भैया यह पैदल यात्रा या जनसंपर्क  कोई  खेल नहीं है, यह बारहवीं के परीक्षा जैसा है , इसमें  कैसा उत्तर मतदाता देते हैं उस पर मार्क्स मिलेंगे नेतायों को। जिस पार्टी के जितने नेता ज्यादा पास होंगे वही पार्टी शाशन करेगी या यूँ बोले "राज " करेगी। तो भैया तैयार हो जाओ परीक्षा देने और पास होने के लिए।