Friday, December 6, 2013

औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।

औरतों का सम्मान करें और उनसे डरे।


हम हर रोज़ अखबारों में पड़ते हैं कि किसी महिला के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ, और इत्यादि। ये सोचने कि बात है कि ऐसा महिलाओं के साथ क्यूँ होता है ? क्या पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता है ? क्या कभी किसी मीडिया ने इस बात का उजागर किया कि किसी लड़के के साथ छेड़खानी हुई , बलात्कार हुआ , नाज़ायज फायेदा उठाया गया ? क्या सिर्फ और सिर्फ लड़कियों के साथ होते हैं ? अभी परिस्थिति ऐसी हो गयी कि आप यदि किसी लड़की के कंधे पर हाथ डालके बात करो या उनसे दोस्ताना के रूप में मज़ाक करो तो कुछ देर बाद वही लड़की रिपोर्ट लिखाये कि उसका दोस्त / लड़के ने उसे छुआ और केस दर्ज हो जाता है। कानून ही हमारे देश में ऐसा बना हुआ है कि सब लड़कियों के फेवर में है। अभी कि स्तिथि में समाज पुरुष प्रधान नहीं है। ५०-५० हो गया है , पर हाँ scientifically लड़के थोड़े मजबूत होते हैं महिलाओं से।


IPC कि धारा 498 / 498 a का कुछ महिलाएं गलत फायेदा उठाकर लड़केवालों को सलाखों के पीछे डाल देते है , क्या ऐसा करना सही है ? लड़के पक्ष वालों कि बात क्यूँ नहीं सुनी जाती है ? भारत में इस प्रकार के कानूनों का संगसाधन होना ज़रूरी है तथा साथ में यह भी परिभाषित हो कि किस प्रकार का छूना , बोलना , हाथ रखना आदि क़ानूनी दायरे में आते हैं।

मानलीजिए कोई लड़की इंटरव्यू देने जाती है और उनका इंटरव्यू कंपनी के HR मेनेजर ले रहे हैं और किसी कारन वश उनका चयन नहीं होता है  और लड़की बाद मे पुलिस स्टेशन पहुंचकर बयान  दे कि फलाने  ने मुझसे यह डिमांड किया, तो इस बाबत मेरा चयन नहीं हुआ।  तो इस प्रकार के केसों का फिर क्या होगा ? क्या इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति सलाखों के पीछे होगा? बहुत ही अहम् प्रश्न  है।  आजकल अधिकतर केस झूटे होते हैं , बदला लेने के लिए भी हो सकता है।  प्यार किया पर शादी नहीं हुई, दोस्त हैं, फिर जो भी दोनों के बीच आपसी सहमति से होता है और बादमे लड़की पुलिस में कम्प्लेन कर देती है। इस प्रकार के केसों का कैसे हल निकालेंगे।? इस अहम् विषय पर बहस होनी चाहिए और साथ ही कमेटी बनाकर सभी एंगल को ध्यान में रखकर कानून में संगसाधन होना चाहिए।

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