Wednesday, July 10, 2013

सरोरा - उरला रोड की हालत गंभीर

सरोरा - उरला रोड की हालत गंभीर 



रायपुर के जानेमाने औधोगिक केंद्र उरला एवं सिलतरा के रास्तों की हालत अति -गंभीर बनी हुई है।
इस शेत्र से छत्तीसगढ़ सरकार को अधिक आय होती है फिर भी इस शेत्रों की हालत जस-कि-तस बनी हुई है. औधोगिक एरिया में काम करने वाले मजदुर , कर्मचारी तथा यहाँ के रहवासियों को अत्यधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इन रास्तों से भारी गाड़ियों का आवागमन होता है साथ ही इन्ही रास्तों से मजदुर, कर्मचारी तथा रहवासियों को भी आवागमन के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है.

उरला -सरोरा रस्ते की हालत जर्जर हालत में है. पाठ्य पुस्तक निगम के मुख्या डिपो के सामने वाला रास्ता कच्चा है जो की मिटटी से बनी हुई है और इस रास्ते में अनगिनत गढ्ढे हैं और बरसात के समय इन गढ्डों में पानी भर जाने के कारण दुर्घटना की स्तिथि बनी रहती है. यही रास्ता आगे जाकर उरला -सरोरा रस्ते से मिलती है जिसकी हालत और भी गंभीर है. साथ ही रौशनी की कमी होने के कारण रात को रास्ता ठीक से दिखाई नहीं पड़ती है. इसी रास्ते को  सभी मजदुर  एवं कर्मचारी उपयोग करते हैं. कभी भी उरला-सरोरा रास्ते में कोई बड़ी दुर्घटना घट  सकती है. यदि कोई दुर्घटना घाट जाये तो इसकी जिम्मेदारी  कौन लेगा ?

सरकार को चाहिए की वे अपने प्रतिनिधि को भेजकर जानकारी लें और अधिकारीयों को मुआएना के लिए भेजे. नगर पालिका बिरगांव के अधिकारीयों को भी चाहिए की वे इस रस्ते को देखें और त्वरित कार्यवाही करते हुए उरला-सरोरा रास्ते को दुरुस्त करे.
बाहर से अपना रायपुर शहर बहुत ही सुन्दर  दीखता है लेकिन रायपुर के औधोगिक  शेत्रों की देखभाल कौन करेगा.

सुदिप्तो चटर्जी 
समाज सेवी एवं 
छत्तीसगढ़ प्रदेश सचिव - अखिल भारतीय ब्राह्मण सेना 

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