Monday, February 4, 2013

स्कार्फ का एक और पहलु /.

स्कार्फ का एक और पहलु /.

आमतौर पर हम देखते हैं की दो पहिया वाहन पर या तो दोनों लोग स्कार्फ बांधे होते हैं , या हेलमेट पहने होते हैं या कुछ भी नहीं पहेनते हैं सिर और चेहरा ढकने के लिए /. लेकिन हम आज ये देखते हैं की सामने वाला/वाली जो गाड़ी चला रहे होते हैं अपना चेहरा नहीं ढाकते है अपितु पीछे बैठने वाले अपना पूरा का पूरा चेहरा ढाक के रखते हैं/. इसका मतलब समहज से परे है।/जो गाड़ी चला रहा होता है उसे तो अधिक प्रदुषण का चिंता होना चाहिए न की पीछे बैठे हुए लोग /.क्यूँ की पीछे बैठने से तो एक आप को हवा कम लगती है, प्रदुषण जो है वो अधिक चलाने वाले को लगनी चाहिए फिर भी लोग पीछे बैठकर अपना मुह किस्से छुपा रहे  हैं , या पीछे बैठकर स्कार्फ बंधने का औचित्य क्या है?

यही समाज  है , सब कुछ आँखों के सामने हो रहा है फिर भी हम खामोश हैं/.इसका कोई जवाब क्या हम दे पाएंगे /. स्कूल जाती ग्रुप में बच्चियां जिनमे से एक या दो अपना चेहरा स्कार्फ से ढाक लेते हैं बाकि सिंपल उनके साथ जाते रहते हैं।/ क्या वे प्रदुषण मुक्त हैं या प्रदुषण से बचने  के लिए कोई टिका लगा रखे हैं /.








यह सोचने  का विषय है /.समाज को सम्ह्जना होगा की हम किस पथ पर अग्रसित हो रहे हैं/.

मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता  के रूप में यह सोचता हूँ की हम कैसे इसे रोकें /. चारो तरफ घटनाएँ घट रही है , फिर भी हम सचेतन नहीं हो रहे हैं/. मै मीडिया से दरख्वास्त करूँगा की इन विषयों को प्रमुखता से उठायें , ताकि लोग जागृत हों और हम आगे होने वाले किसी भी घटना-दुर्घटना से बच पायें।

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